Sunday, July 22, 2018

दिन शुभ हमारा कर दिया



एक प्यारी सी मधुर
मुस्कान देकर
आपने दिन शुभ,
हमारा कर दिया
अनमना हर आदमी
बेहद दुखी और मौन है
हर तरफ फैली
उदासी मुस्कुराता
कौन है
एक नन्हीं आस को
वरदान देकर
आपने उत्साह मन में
भर दिया
जाल सन्नाटे निरन्तर
बुन रहे हैं
कौन बोले।
कर बढ़ा सम्वेदना की
कुंडियों को
कौन खोले।
प्यार के दो बोल
होंठो पर सजाकर
सच कहूँ दारिद्र मन से
हर लिया ।

- मनोज जैन 'मधुर'
१ जून २०१८

रक्षा बंधन के गीत ( भोजपुरी लोकगीत)

गलिया क गलिया फिरइ मनिहरवा,
के लइहैं मोतिया क हार-हिंडोलवा।
मोतिया क हार लइहैं भैंया हो - भैया,
जेकर बहिनी दुलारी - हिंडोलवा।
पाछे लागी ठुनकई बहिनी रानी,
एक लर हमहूं क देहूं - हिंडोलवा।
एक लर टुटि हैं सहस मोती गिरि हैं।
एक लर बहिनि तुं लेउ - हिंडोलवा।

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माइ तलवा कुहकइ मोर।
माई जेठरा भइअवा जिनि होइहैं सावन नीअर।
माई सार बहनोइया एकै होइहैं सावन नीअर।
माई बभना का पूत जिनि पठये सावन नीअर।
माई पोथिया बांचन लगिहें सावन नीअर।।
माई लहुरा भइयवा पठये सावन नीअर।
माई रोइ-गाइ बिदवा करइहैं सावन नीअर।।

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ठाढ़ी झरोखवा मैं चितवऊं,
नैहरे से कोई नाहीं आइ।
ओहिरे से केउ नाहीं बपई रे
जिन मोरी सुधियों न लीन।
ओहिरे बहिनिया कैसन बीरन,
ससुरे में सावन होई।